Janiye Veer Ras Ki Paribhasha Udaharan Sahit

अपने अपनी हिंदी पुस्तकों में रस जरूर पढ़ा होगा उसका ही एक भाग वीर रस जिसको बहुत ही कम लोग जानते अगर आपको  इसके बारे में जानना कहते हो तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़े क्योकि आपको veer ras ki paribhasha udaharan sahit जानेगे के साथ-साथ इसके प्रकार और इसके अवयव  भी जानने को मिलेगा।

वीर रस की परिभाषा | Veer Ras Ki Paribhasha

वीर रस वह भावना जब विकसित होती है तब युद्ध में संलग्न होने या कठिन गतिविधि करने की निरंतर आवश्यकता हृदय में जागृत होती है। वीर रस ने अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। जिसे वीर रस के रूप में संदर्भित किया जाता है वह उत्साह की मानसिक स्थिति है जो किसी कार्य पर काम करने या साहित्य के एक टुकड़े को पढ़ने के बाद विकसित होती है।

वीर रस का स्थायी भाव क्या है?- उत्साह वीर रस का स्थायी भाव है।

वीर रस के अवयव | Veer Ras ke Avyav

स्थायी भाव-  उत्साह

संचारी भाव- आवेग, गर्व, उग्रता, अमर्ष, असूया

आलम्बन- शत्रु व याचक

उद्दीपन- शत्रु का अभिमान, शूरवीरों की गर्जना, दीनों का शोक, याचना करने वालों का गुणगान

अनुभाव- अंग स्फुरण, रोंगटे खड़े हो जाना

। Veer Ras ke prakar

आलम्बन भेद के आधार पर इन्हे चार भागो में बता गया हैं। 

 जैसे-

युद्धवीर- जब युद्ध के लिए उत्साह हो

दयावीर-जब गरीबों पर दया करने की इच्छा हो

धर्मवीर- जब धर्म प्रचार अथवा धर्म कार्य करने का उत्साह हो

दानवीर- जब दीनों को दान करने का उत्साह हो

वीर रस का उदाहरण | Veer Ras Ka Udaharan 

  • वीर और धीर दोनों “तुम बढ़े चलो” गाते हैं।

बच्चों की पार्टी हाथ में झंडा लेकर सजी है; झंडा कभी नहीं झुका, और पार्टी जारी रही।

वीर और धीर दोनों “तुम बढ़े चलो” गाते हैं।

उनके सामने पहाड़ हो और शेर की दहाड़ हो।

तुम निडर होकर बिना भयभीत हुए वहीं खड़े रहो।

वीर और धीर दोनों “तुम बढ़े चलो” गाते रहो।

  • फहरी ध्वजा, फड़की भुजा, बलिदान की ज्वाला उठी।

निज जन्मभू के मान में, चढ़ मुण्ड की माला उठी।

  • सत्य कहता हूँ सखे, सुकुमार मत जानों मुझे,

यमराज से भी युद्ध में, प्रस्तुत सदा मानो मुझे।

है और कि तो बात क्या, गर्व मैं करता नही,

मामा तथा निज तात से भी युद्ध में डरता नहीं॥

  • बातन बातन बतबढ़ होइगै, औ बातन माँ बाढ़ी रार,

दुनहू दल मा हल्ला होइगा दुनहू खैंच लई तलवार।

पैदल के संग पैदल भिरिगे औ असवारन ते असवार,

खट-खट खट-खट टेगा बोलै, बोलै छपक-छपक तरवार॥

निष्कर्ष

आज इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको यह बतया की veer ras ki paribhasha udaharan sahit, Veer Ras ke Avyav, Veer Ras ke prakar, veer ras ka udaharan आदि हम आशा करते है की इस आर्टिकल से आपको  veer ras ki paribhasha udaharan sahit बतया।

 

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