Qutub Minar Delhi, History, Height & More

Qutub Minar Delhi, भारत के दिल्ली शहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है जो भारतीय स्थापत्यकला की महानता का प्रतीक है। यह विश्व धरोहर स्थलों में गिना जाता है और उत्तर भारतीय वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरणों में से एक है। यहाँ तक कि यहाँ की भव्यता और विश्वसनीयता के कारण यह दुनिया भर में पर्याप्त प्रशंसा प्राप्त कर चुका है,इसके शानदार इतिहास से लेकर भव्य वास्तुकला तक, इस संरचना के बारे में सब कुछ विस्मयकारी है। इस लेख में, हम Qutub Minar Delhi के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से जानेंगे।

Qutub Minar History – 12वीं सदी में शुरू हुई कुतुब मीनार की कहानी

Qutub Minar का निर्माण 12वीं सदी में शुरू हुआ था। इसकी नींव सुलतान इल्तुतमिश ने रखी थी, जिन्होंने दिल्ली के तख्त पर कुल 5 बार राजभवन की तक़दीर बदली थी। यह इतिहास के पन्नों में उल्लेखित है कि इसे उन्होंने जीतकर हिन्दू युद्धकुशल सम्राट समुद्रगुप्त द्वारा जितवाया गया था। यह ब्राजीली कुतुब के निर्माण के लिए विदेशी वास्तुकला के तत्त्वों का उपयोग करते हुए निर्मित किया गया था जो उस समय के लिए अत्याधुनिक थे।

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लगभग 300 साल बाद, 1803 में, एक भूकंप में टावर को फिर से गंभीर क्षति हुई। ब्रिटिश भारतीय सेना के एक सदस्य, मेजर रॉबर्ट स्मिथ ने 1828 में संरचना की मरम्मत की। वह आगे बढ़े और पांचवीं मंजिल के ऊपर बैठने के लिए एक स्तंभयुक्त गुंबद स्थापित किया, इस प्रकार टावर को छठी मंजिल मिल गई। लेकिन इस अतिरिक्त कहानी को 1848 में भारत के तत्कालीन गवर्नर-जनरल हेनरी हार्डिंग के आदेश के तहत हटा दिया गया और मीनार के बगल में पुनः स्थापित किया गया। 1981 में एक दुर्घटना के बाद से टावर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिसमें इसके अंदर मौजूद 47 लोगों की मौत हो गई थी।

Qutub Minar Delhi – वास्तुकला का उत्तम उदाहरण

कुतुब मीनार का उच्चतम बिंब उसकी अत्यधिक ऊँचाई है, जो लगभग 72.5 मीटर (237 फीट) है। यह अद्वितीय वास्तुकला की उत्तम उदाहरण है और उस समय के बांग्ला वास्तुकला के लिए आदर्श माना जाता है। इसकी ऊँचाई और अद्वितीय वास्तुकला उपाधियों के लिए इसे भारतीय स्थापत्यकला का रत्न माना जाता है।

Qutub Minar का निर्माण लाल पत्थर और मार्बल से हुआ है जो उस समय की विदेशी वस्तुकला की प्रमुख विशेषता थीं। इसमें 379 विभिन्न शिल्पकला के अद्वितीय डिजाइन और कढ़ाई का काम देखने को मिलते हैं, जिनमें ताक, जाली, गुमटी और चित्रकला शामिल हैं। इन शिल्पकलाओं की वास्तुकला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वे उस समय के उत्कृष्ट वास्तुकला के उदाहरणों में गिने जाते हैं।

Qutub Minar Delhi – सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व

Qutub Minar का निर्माण सुलतान इल्तुतमिश के द्वारा तथा उसके पश्चात्ताप और शासन कार्य के वक्त हुआ था। यह स्थल भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में जाना जाता है जिसमें इस्लामिक संस्कृति और भारतीय सांस्कृतिक तत्त्वों का मिश्रण है।

कुतुब मीनार भी धार्मिक महत्व रखता है। यहाँ एक प्राचीन हिन्दू मंदिर के अवशेष भी मिले हैं, जो सूफी आदर्शों और भारतीय परंपराओं के अंतर्गत समाहित किए गए हैं।

निष्कर्ष

Qutub Minar एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वास्तुकला की अमूर्त श्रेष्ठता है जो भारतीय स्थापत्यकला के संरचनात्मक और विस्तृत विकास का प्रतीक है। यह एक जगह है जो इतिहास, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के साथ-साथ आद्यतन विकास के उदाहरण के रूप में उचित था। आज भी, यह विश्व भर से आने वाले पर्यटकों की दृष्टि का केंद्र रहा है और उन्हें भारतीय स्थापत्यकला के इस अद्वितीय और विश्वसनीय रत्न का आनंद लेने का अवसर प्रदान करता है।

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